जब कोई मनुष्य बड़ा अपराध करता है, तो उसे बड़ी ही सजा मिलती है। फांसी की सजा या फिर उम्र कैद की सजा, लेकिन उम्र कैद से बड़ी सजा फांसी की होती है, क्योंकि जब फांसी का नाम अपराधी सुनता है, तो वह स्वयं भी थर-थर कांपने लगता है। किसी अपराधी को कोर्ट में जब जज साहब के द्वारा फांसी की सजा सुनाई जाती है, तो जज सजा सुनाने के बाद उस पेन की निब को तोड़ देता है जिस पेन से उस अपराधी की सजा लिखता है। इसी प्रकार अपराधी को फाँसी देने के बहुत से नियम (Fansi Dene Ke Niyam) होते है, जो इस पोस्ट में हम आपको बताने वाले है।


भारत में फांसी के नियम
भारत में फांसी के नियम




भारत में फांसी देने के नियम - Fansi Dene Ke Niyam Kya Hai

Some Rules About Hanging in India- हमारे देश में किसी भी मुजरिम को फांसी दी जाती है तो उसके पहले कुछ औपचारिकता होती हैं उसके बाद ही उसे फांसी पर लटकाया जाता। इन सभी के बगैर अपराधी को फांसी नहीं दी जाती है।



  • सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक जिसे मौत की सजा दी जाती है उसके रिश्तेदारों को कम से कम 15 दिन पहले खबर मिल जानी चाहिए ताकि वो आकर मिल सकें।

  • फांसी की सजा पाए कैदियों के लिए फंदा जेल में ही सजा काट रहा कैदी तैयार करता है आपको अचरज हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों के जमाने से ऐसी ही व्यवस्था चली आ रही हैं।

  • देश के किसी भी कोने में फांसी देने की अगर नौबत आती है तो फंदा सिर्फ बिहार की बक्सर जेल में ही तैयार होता है इसकी वजह यह है कि वहां के कैदी इसे तैयार करने में माहिर माने जाते हैं।

  • फांसी के फंदे की मोटाई को लेकर भी मापदंड तय है। फंदे की रस्सी डेढ़ इंच से ज्यादा मोटी रखने के निर्देश हैं। इसकी लंबाई भी तय हैं।

  • फाँसी के फंदे की कीमत बेहद कम हैं। दस साल पहले जब धनंजय को फांसी दी गई थी, तब यह 182 रुपए में जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया था।






इसके अलावा फांसी देने के कुछ और भी नियम होते है जोकि पहले से ही कोर्ट द्वारा निश्चित किये जाते है, जैसे-


  • जेल में कौन-कौन होगा?

  • जल्लाद कौन होगा?

  • फांसी का फंदा कैसा होगा ?

  • फांसी का स्थान व समय क्या होगा ?

  • फांसी की सूचना किस किसको देनी है ?

  • फांसी के बाद शव का क्या होगा ?

  • कौन कौन फांसी के वक्त जेल में रहेगा ?


  • फांसी देते वक्त कौन कौन जेल में मौजूद होता है ?
👉 जेल अधीक्षक
👉 डॉक्टर
👉 एजुकेटिव मजिस्ट्रेट
👉 जल्लाद मौजूद होते है।



फांसी से जुड़े कुछ अन्य नियम और कुछ खास बातें - Some Other Rules of Hanging in Indi

  • जिस अपराधी को फांसी दी जाती है उस अपराधी के साथ आखिरी वक्त तक जल्लाद ही होता है, क्योंकि सबसे बड़ा काम जल्लाद को करना होता।

  • फांसी हमेशा सुबह के समय ही दी जाती है

  • फांसी देने से पहले कैदी को नहलाया जाता है

  • कैदी को नए कपड़े पहनाए जाते हैं

  • उसके बाद उसे फांसी के फंदे तक लाया जाता है



फांसी के पहले जल्लाद मुजरिम के कान में क्या कहता है - Fansi Dene se Pahle Jallad Apradhi ke Kan Me Kya Kahta Hai

फांसी के पहले जल्लाद मुजरिम के कान में कहता है मुझे माफ़ करो मैं सरकार का गुलाम हूँ । आपके लिये मेरे बस कुछ नही है।

अगर हिन्दू होता है तो राम राम कहता है और अगर मुस्लिम होता है तो सलाम बोलता है। उसके बाद उसे लटकाया जाता है।


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