जल्लाद का नाम सुनते ही जहन में एक खतरनाक और खूंखार आदमी की शक्ल याद आ जाती है जो लोगों की जान लेने लेने का काम करते हैं और इसके लिए उन्हें पैसे भी मिलते हैं। वैसे ज्यादातर लोग ये नौकरी करना पसंद नहीं करते हैं, क्योंकि यह इतना आसान नहीं होता है। जल्लाद का काम होता है किसी को भी फांसी पर लटकाना और इसके लिए तो इंसान के अंदर हिम्मत होनी चाहिए। 


फांसी से जुडी कुछ खास बातें,  कैसे तैयार होती है फांसी की रस्सी
फांसी से जुडी कुछ खास बातें,  कैसे तैयार होती है फांसी की रस्सी


जल्लाद एक सरकारी नौकरी है। मन किया तो काम किया वरना ऑफिस में बैठकर आराम फरमा लिया। जी हां, सरकारी नौकरी में कुछ ऐसी ही सुविधाएं मिलती हैं तो हर इंसान के मन को ललचा देती हैं।
हमारे देश मे एक ऐसी भी सरकारी नौकरी है जो कोई इंसान करना नहीं चाहता है। चौंक गए न, ये बात सौ टका सच है कि इस सरकारी नौकरी से हर कोई दूर भागता है। इस सरकारी नौकरी को कोई करना नहीं चाहता है। इस पद का कोई महत्व भी नही था अब तक। शायद अब जरूरत पड़ सकती है। अभी तक इस पद का कोई अभी महत्व था। सरकार वैकेंसी भी नही निकालती क्योकि इस पद पर कोई काम नही करना चाहता है। वर्षो से पद खाली पड़े है। जिस तरह बलात्कर पर देश भर में फांसी की उबाल है तो भविष्य में कम से कम दस लोगो की फांसी तय है । देश मे एक जल्लाद वो भी कांटेक्ट पर इन जल्लाद का नाम सरकारी पद में जल्लाद ही रखा गया जो शब्द से ही अपमानित लगता है । जल्लाद कोई केंद्र का सरकारी पद नही है ये राज्य सरकार के पद है, इसलिये किसी राज्य को जल्लाद की जरूरत नही पड़ी।


तो ऐसे तैयार होती है फांसी की रस्सी
फांसी के लिए रस्सी की लंबाई भी कैदियों के वजन के हिसाब से तय होती है. दरअसल, जिस तख्ते पर फांसी दी जाती है. उस तख्ते के नीचे कुएं की गहराई 15 फीट होती है। ताकि जमीन और झूलते पैर के बीच पूरा फासला हो। फांसी के फंदे पर झूलने वाले शख्स का वजन अगर 45 किलो या उससे कम है तो फिर तख्ते के नीचे कुएं में लटकने के लिए रस्सी की लंबाई ज्यादा रखी जाती है। जो करीब आठ फीट होती है। जबकि फांसी पर चढ़ाए जाने वाले शख्स का वजन अगर 90 किलो या उससे ज्यादा है, तो कुएं में झूलने के लिए रस्सी की लंबाई कम रखी जाती है। करीब छह फीट, ऐसा इसलिए होता है वजन की वजह से रस्सी पर दबाव ज्यादा पड़ता है। रस्सी की लंबाई की नाप सिर से नहीं बल्कि बाएं कान के नीचे जबड़े से ली जाती है। क्योंकि फांसी के फंदे की गांठ वहीं से शुरू होती है। 
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