Navratri Festival- नवरात्रि हिन्दुओ का प्रमुख त्योहारों में से एक है, नवरात्री के 9 दिनों में देवी दुर्गा के सभी रूपों की जाती है। पूजा करने से पूर्व सभी के यहाँ कलश को स्थापित किया जाता है, जिसे माँ दुर्गा (Maa Durga) का प्रतीक माना जाता है। इस पोस्ट में आप पढ़ेंगे की नवरात्री में कलश को स्थापित (Navratri Kalash Sthapana Mantra) करने से पूर्व या उसके साथ कौन से मंत्रो को बोलना चाहिए।


Navratri Kalash Sthapana Mantra
Navratri Kalash Sthapana Mantra



कलश स्थापना के लिए मंत्र- Navratri Kalash Sthapana Mantra

Navratri Kalash Sthapana Mantra- जब भी नवरात्रों की शुरुआत होती है, सबसे पहले दिन कलश को स्थापित किया जाता है, जिसके लिए जरूरी है की आपको कलश स्थापना की विधि (Kalash Sthapana Vidhi) और उसके लिए कलश स्थापना का मंत्र (Kalash Sthapana Mantra) पता होना चाहिए। जिससे माँ दुर्गा भी खुश रहती है और उनका आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहता है। कलश स्थापना में नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें। 


अपने को पवित्र करें- नवरात्र में कलश स्थापित करने वाले को सबसे पहले पवित्र होने के मंत्र का जाप करना चाहिए, जो कुछ इस प्रकार है। 

ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

हाथ में कुश और जल लेकर इस मंत्रा को पढ़कर स्वयं को और पूजन सामग्री को पवित्र कर लेना चाहिए। 




कलश को स्थापित करें- कलश को स्थापित करते समय मंत्र का उच्चारण होता रहने चाहिए, जिसके लिए मंत्र कुछ इस प्रकार है- 

ॐ आजिग्घ्र कलशं मह्या, त्वा विशन्त्विन्दवः ।
पुनरूर्जा निवर्त्तस्व, सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा, पयस्वती पुनर्मा विशताद्रयिः ।।


जलपूरण - कलश को स्थापित करने के बाद सावधानी से जल को कलश में भरें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।

ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि, वरुणस्य स्कम्भसर्जनी स्थो, वरुणस्यऽऋतसदन्यसि, वरुणस्यऽऋत सदनमसि, वरुणस्यऽऋतसदनमासीद ॥


मंगल द्रव्य स्थापना- जल के बाद या जल के साथ ही कलश में दूर्वा, कुश, पूगीफल, सुपारी और पुष्प इत्यादि डालें और साथ में मंत्र का जाप करें। 

ॐ त्वां गन्धर्वाऽअखनँस्त्वाम्, इन्द्रस्त्वां बृहस्पतिः ।
त्वामोषधे सोमो राजा, विद्वान्यक्ष्मादमुच्यत


कलश पे कलावा बांधे- अब मंत्र के साथ ही कलश पर कलावा लपेटे। 

ॐ सुजातो ज्योतिषा सह, शर्मवरूथ माऽसदत्स्वः ।
वासोऽ अग्ने विश्वरूप सं व्ययस्व विभावसो ॥





नारियल रखे- इन सब के बाद अब कलश के ऊपर आम के कुछ पत्तो के साथ नारियल को स्थापित करें। 

ॐ याः फलिनीर्या ऽ अफलाऽ, अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः ।
बृहस्पतिप्रसूतास्ता, नो मुञ्चन्त्व हसः ।।



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