Dev Uthani Ekadashi - हिन्दू पंचाग के अनुसार एक साल में कुल 24 एकादशी होती है, जिसका मतलब एक माह में दो एकादशी। हिन्दू मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए सो जाते है और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते है और इस कार्तिक शुक्ल एकादशी को ही देवउठनी एकादशी कहते है। 


देवउठनी एकादशी के दिन चतुर्मास का अंत हो जाता है और शादी विवाह के काज शुरू हो जाते है। चलिए इस पोस्ट में हम जानते है की 2021 में देवउठानी एकादशी कब है (Dev Uthani Ekadashi 2021 Mein Kab Hai Date) और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है ?


Dev Uthani Ekadashi 2021 Mein Kab Hai date
Dev Uthani Ekadashi 2021 Mein Kab Hai date 


2021 में देव उठनी एकादशी कब है- Dev Uthani Ekadashi 2021 Mein Kab Hai

2021 mein Dev Uthani Ekadashi Kab Hai- कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (ग्यारस) को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। साल 2021 में यह एकादशी 14 नवंबर, 2021 दिन रविवार की है। इस दिन चार माह की नींद से देव जागेंगे और मंगल काज सवारेंगे। इस तिथि के दिन भगवान विष्णु और महा लक्ष्मी के साथ ही तुलसी की भी विशेष पूजा की जाती है। इस दिन से शादी विवाह के कार्य भी शुरू हो जाते है।



इस दिन होगा चतुर्मास का समापन- इस समय 20 जुलाई 2021 से चातुर्मास चल रहा है और यह अब देव उठानी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2021) वाले दिन ही खत्म होगा। इन बीच के दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते है और देव उठानी एकादशी वाले दिन से ही शुभ कार्यो की शुरुआत होती है। इस एकादशी वाले दिन बिना मुहूर्त सुझाये भी सभी शुभ कार्य समपन्न किये जा सकते है। 




देव उठानी एकादशी ग्यारस 2021 पूजा का मुहूर्त- Dev Uthani Ekadashi 2021 Shubh Muhurat

जैसा की हमने आपको बताया की साल 2021 में देव उठानी एकादशी 14 नवंबर की है, इसका शुभ मुहूर्त और समय (Dev Uthani Ekadashi 2021 Muhurat) कुछ इस प्रकार है- 

  • देवउठनी एकादशी ग्यारस पारण मुहूर्त - 14 नवंबर को , 01:09:56 से 03:18:49  तक


  • हरी वासर समाप्त होने का समय - 14 नवंबर को 01:02:41 पर 


इसी समय के बीच आप भगवान विष्णु, देवी महा लक्ष्मी और तुलसी देवी का पूजन कर सकते है।



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देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह - Devuthani Ekadashi Tulsi Vivah

इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है, तुलसी के पौधे व शालिग्राम की यह शादी सामान्य विवाह की तरह पुरे धूमधाम से की जाती है। आपको पता होगा की तुलसी को विष्णु प्रिय भी कहा जाता है, जिसकी वजह से भगवान विष्णु जब भी जागते है तो सबसे पहले अपनी प्रिय देवी तुलसी की सुनते है। इसी प्रकार तुलसी विवाह का सीधा अर्थ है की तुलसी के माध्यम से भगवान का अहान करना। शास्त्रों में कहा गया है की जिन दम्पत्तियों के कन्या नहीं होती, वे जीवन में तुलसी का विवाह करके कन्यादान का पुर्ण्य अवश्य प्राप्त करें।



देव उठानी एकादशी का महत्त्व - Dev Uthani Ekadashi Shubh Muhurat

सभी एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सबसे शुभ माना गया है, और एकादशी के व्रत का वर्णन महाभारत काल से मिलता है, जिसमे श्रीकृष्णा ने युधिष्ठिर को एकादशी व्रत के महत्त्व के बारे में बताया था। इसके बाद युधिष्ठिर ने विधि पूर्वक एकादशी के व्रत को पूर्ण किया था। एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है और सभी की मनोकामना को पूर्ण करता है।


कुछ अन्य सवाल जवाब

  • देवउठनी एकादशी कब से कब तक है?

देव उठानी एकादशी 14 नवंबर 2021, दिन रविवार को दोपहर के 1 बजकर 9 मिनट से लेकर दोपहर के ही 3 बजकर 18 मिनट तक है और एकादशी का हरिवासन 14 नवंबर को ही 1 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगा। 



  • देव कब उठेगा?

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2021) को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। साल 2021 में यह एकादशी 14 नवंबर, 2021 दिन रविवार की है। इस दिन चार माह की नींद से देव उठेंगे और मंगल काज सवारेंगे। इस तिथि के दिन भगवान विष्णु और महा लक्ष्मी के साथ ही तुलसी की भी विशेष पूजा की जाती है। इस दिन से शादी विवाह के कार्य भी शुरू हो जाते है।



  • देवउठनी एकादशी को क्या करना चाहिए?

देव उठानी एकादशी वाले दिन से ही शुभ कार्यो की शुरुआत होती है। इस एकादशी वाले दिन बिना मुहूर्त सुझाये भी सभी शुभ कार्य समपन्न किये जा सकते है। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है, तुलसी के पौधे व शालिग्राम की यह शादी सामान्य विवाह की तरह पुरे धूमधाम से की जाती है।




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