कोई भी व्रत या त्यौहार हो और उसे सही ढंग से या नियमानुसार ना किया जाये तो उसका फल सही नहीं मिलता और ऐसे व्रत का फिर कुछ फायदा भी नहीं होता। इसलिए जरुरी है की किसी भी व्रत या त्यौहार को उस व्रत की विधि अनुसार ही करना चाहिए।


अब बात करे एकादशी के व्रत की तो यह तो विष्णु भगवान के व्रत होते है, इन व्रतों में दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमो और व्रत विधि का पालन करना चाहिए। तो चलिए अब इस पोस्ट में हम यही जानते है की एकादशी के व्रत की विधि क्या है - Ekadashi Vrat Ki Vidhi in Hindi


एकादशी के व्रत की विधि क्या है - Ekadashi Vrat Ki Vidhi in Hindi
एकादशी व्रत की विधि बताइए - Ekadashi Vrat Vidhi in Hindi


एकादशी के व्रत की विधि - Ekadashi Vrat Ki Vidhi in Hindi

सबसे पहले हम यह जानते है की का व्रत कब कब रखा जाता है - हर माह में दो पक्ष होते है एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्णा पक्ष। दोनों पक्षों की ग्यारवी तिथि को एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस हिसाब से अगर देखे तो एक साल में कुल मिलाकर 24 एकादशी की तिथियाँ पड़ती है और हर महीने में दो एकादशी व्रत। जैसा की हमने आपको बताया की एकादशी के व्रत लिए सबसे पहले जरुरी है की हमे इसके लिए नियमो का पालन दशमी तिथि से ही करना चाहिए।


दशमी तिथि- इसके लिए दशमी तिथि को दिन छिपने से पहले ही भोजन कर ले, ताकि पेट में एकादशी के दिन भोजन का अंश नहीं हो। दशमी तिथि को ही पालनकर्ता श्री हरी विष्णु जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प ले। दशमी तिथि की रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्या का पालन करना चाहिए तथा भोग विलास से दूर रहना चाहिए।



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एकादशी व्रत की विधि क्या है- अब एकादशी वाले दिन हमे कुछ इस प्रकार व्रत की विधि (Ekadashi Vrat Ki Vidhi Kya Hai) का पालन करना चाहिए- 


  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठे।

 

  • स्नान आदि से निर्व्रत होकर मंदिर आदि की सफाई करें।

 

  • पुरे घर में गंगाजल छिड़के। 


  • मंदिर में भगवान को गंगाजल से स्नान कराये।

 

  • उन्हें वस्त्र अर्पित करें। 


  • रोली और अक्षत से तिलक करें।

 

  • फ़ूलों से भगवान का श्रृंगार करें। 


  • भगवान को फल और मेवे का भोग लगाए। 


  • सबसे पहले भगवान गणेश और फिर माता लक्ष्मी के साथ श्री हरी की आरती करें। 


  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाये" मंत्र का जाप करें।

 

  • हो सके तो अन्य आरतियों के साथ घर में या मंदिर में जाकर गीता पाठ जरूर करें। 


  • भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते जरूर अर्पित करें। 

 

  • इस व्रत को करने वाला दिव्या फल पप्राप्त करता है और उसके जीवन के सारे फल समाप्त हो जाते है।


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