सकट का व्रत भगवान गणेश जी को समर्पित है। वैसे तो हर महीने में चतुर्थी के दो व्रत होते है और दोनों ही व्रत भगवान गणेश जी की पूजा के होते है, लेकिन माघ मास की कृष्णा पक्ष की चतुर्थी को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत को हम तिल कुटनी चौथ, संकटा चौथ, माघी चौथ, वक्रतुंडी चौथ भी कहते है। 


हर महीने में दो चतुर्थी आती है, जिसमे एक कृष्णा पक्ष की और दूसरी शुक्ल पक्ष की होती है। कृष्णा पक्ष की चतुर्थी को हम संकष्टी चतुर्थी कहते है और दूसरी यानि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हम विनायक चतुर्थी कहते है। साल में माघ मास के कृष्णा पक्ष की चतुर्थी की सबसे अधिक मान्यता है, जिसे हम सकट चौथ के नाम से जानते हैं। अब इस पोस्ट में हम जानते है की सकट चौथ का व्रत करने का क्या तरीका है और सकट का व्रत कैसे किया जाता है - Sakat Chauth Ka Vrat Kaise Karte Hai



Sakat Chauth Ka Vrat Kaise Karte Hai in Hindi | सकट चौथ व्रत करने का तरीका
तिल कूट चौथ का व्रत करने का तरीका क्या है - Sakat Chauth Vrat Karne Ka Tarika Kya Hai


सकट चौथ व्रत करने का तरीका - Sakat Chauth Ka Vrat Kaise Karte Hai 2022 in Hindi

सकट चौथ का मतलब होता है, दुःखो को हरने वाला और भगवान गणेश तो है भी विघ्नहर्ता। इस व्रत की पूजा महिलाएं अपने पुत्रों की लम्बी आयु और उन्नति के लिए करती है। संकटा चौथ का त्यौहार भगवान गणेश को समर्पित है।


सकट चौथ 2022 का पूजा मुहूर्त- साल 2022 में माघ मास की सकट चौथ का व्रत 21 जनवरी 2022 का है, जिसमे सकट चौथ की शुरुआत 21 जनवरी को 8 बजकर 50 मिनट पर होगी और यह व्रत 22 जनवरी 2022 को 9 बजकर 15 मिनट ओर खत्म होगा।





Sakat Chauth Vrat Karne Ka Tarika Kya Hai- तिलकुटा चौथ के व्रत को कैसे किया जाता है या फिर सकट के व्रत को करने का तरीका कुछ इस प्रकार है-


सकट चौथ वाले दिन भगवान गणेश जी के साथ चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। इस दिन भगवान गणेश जी के संकटमोचन का पाठ करना चाहिए।


इस व्रत में कुछ महिलाएं निर्जल व्रत भी रखती है और शाम को व्रत की कथा सुनाकर अपने बच्चो के लिए लम्बी आयु का आशीर्वाद मांगती है। 

इस दिन तिलकुट के लड्डू भी लगभग सभी व्रत वाले घरो में बनाये जाते है और कही कही तो तिलकुट का  छोटा सा पहाड़ बनाकर उसको काटने की भी परंपरा है।

इस व्रत के लिए किसी के यहाँ तो रात को तारे देखकर, तो किसी के यहाँ चाँद को देखकर व्रत को खोला जाता है। इसके लिए शाम को तारे/चाँद निकलने के बाद इनको अर्घ्य दिया जाता है और अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत संपन्न माना जाता है। 




सकट चौथ की विशेष पूजा विधि कुछ इस प्रकार है- 

  • चतुर्थी के दिन सुबह स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 

  • हो सके तो इस दिन लाल वस्त्र धारण करें। 

  • गणेश जी की पूजा करते समय अपना मुँह पूर्व अथवा उत्तर दिशा की और करें। 

  • गणेश पूजन के लिए स्वच्छ आसन पर बैठे। 

  • धूप-दीप आदि से भगवान गणेश की पूजा करें। 

  • भगवान श्री गणेश जी को पूजा में फल, लड्डू, मोदक और खासकर तिल के लड्डू अवश्य रखें।

  • शाम के वक्त सकट चौथ की कथा अवश्य सुने व सुनाएं।   

  • इसके बाद गणेश जी की आरती करें। 

  • हो सके तो आखिरी में गणेश मंत्र "ॐ गणेशाय नमः" का जाप करें। 

  • अपने सामर्थ्य के हिसाब से गरीबों को दान करें। 

  • रात को चाँद या तारे देखकर, अर्घ्य दे और अपना व्रत खोले।


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