मार्च का महीना आते ही सबको होली का इंतज़ार होता है, की मार्च के महीने में होली कब होगी। यह रंगो का त्यौहार पुरे देश में मनाया जाता है। होली हिन्दुओ के बड़े त्योहारों में से एक है, जिसे पुरे भारतवर्ष में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है, जिसमे रंगो के साथ साथ प्यार भी बाँटा जाता है और इस त्यौहार से जुडी सभी धार्मिक परम्पराओं को भी पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है। अब जानते है की मार्च में होली कब है 2021 - March Mein Holi Kab Hai 2021


March Mein Holi Kab Hai - मार्च में होली कब है
March Mein Holi Kab Hai



मार्च में होली कब है 2021 - March Mein Holi Kab Hai 2021

होली के त्यौहार में दो दिन होते है, जिसे अपनी भाषा में हम छोटी होली (होलिका दहन) और बड़ी होली (धुलैंडी) कहते है। छोटी होली के दिन होलिका को जलाया जाता है और बड़ी होली के दिन रंगो से होली खेली जाती है। 




March Mein Holi Kab Hai- हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, होली का त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को हर साल मनाया जाता है। मार्च 2021 में होलिका दहन 28 मार्च (रविवार) का और रंगो का त्यौहार होली 29 मार्च (सोमवार) की है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 36 मिनट 38 सेकेंड से शुरू होकर 8 बजकर 56 मिनट 23 सेकेंड तक है। इसकी अवधि लगभग 2 घंटे 19 मिनट की होगी। 





होली क्यों मनाई जाती है - Holi Kyo Manayi Jati Hai 

होली के इतिहास की बात करें तो हिंदू धर्म का मानना ​​है कि हिरण्यकश्यप नाम का एक शैतान राजा था। उनका एक बेटा जिसका नाम प्रहलाद था और एक बहन जिसका नाम होलिका था। ऐसा माना जाता है कि शैतान राजा के पास भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद था। इस आशीर्वाद का मतलब कोई भी आदमी, जानवर या हथियार उसे नहीं मार सकता था। यह आशीर्वाद उसे उसके लिए बन गया और उसने अपने बेटे को नहीं बख्शा क्योंकि वह बहुत घमंडी हो गया था। उसने अपने राज्य को भगवान के बजाय उसकी पूजा करने का आदेश दिया।





इसके बाद, सभी लोग हिरण्यकश्यप की पूजा करने लगे, लेकिन प्रहलाद ने अपने पिता की पूजा करने से इनकार कर दिया क्योंकि प्रह्लाद भगवान विष्णु सच्चे भक्त थे। शैतान राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र की अवज्ञा को देखकर अपनी बहन के साथ प्रहलाद को मारने की पेशकश की। उन्होंने होलिका की गोद में अपने पुत्र प्रहलाद को आग में बैठाया, जहां होलिका जल गई और भगवान विष्णु के ऋषिवरद से प्रह्लाद सुरक्षित निकल आए। तब से लोगों ने विश्वास पर अच्छाई की जीत के रूप में होली मनाना शुरू कर दिया।


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