अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ महीने की कृष्णा पक्ष तिथि को किया जाता है, अपरा एकादशी को जलक्रिड्रा एकादशी, अचला एकादशी और भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ज्येष्ठ मॉस को पूजा, व्रत और दान के लिए उत्तम माना गया है, इसलिए ज्येष्ठ मॉस में पड़ने वाली एकादशी को सबसे अधिक महत्त्व दिया जाता है।


Apara Ekadashi Ka Mahatva Kya Hai - अपरा एकादशी का महत्त्व क्या है
Apara Ekadashi Ka Mahatva Kya Hai - Significance in Hindi 



पौराणिक कथाओं के अनुसार, अपरा एकादशी का अर्थ होता है अपार पुण्य। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से मनुष्य को अपार पुर्ण्य मिलता है, इसलिए इसे अपरा एकादशी कहा जाता है। अपरा एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु मनुष्य के जीवन से सभी दुःख और परेशानियाँ को दूर कर देते है। इस पोस्ट में हम जानते है की अपरा एकादशी का महत्व क्या है - Apara Ekadashi Ka Mahatva Kya Hai





अपरा एकादशी का महत्त्व क्या है - Apara Ekadashi Ka Mahatva Kya Hai

अपरा एकादशी के लिए धार्मिक ग्रंथो में उल्लेख मिलता है की महाभारत काल में युधिष्ठिर के आग्रह करने पर श्रीकृष्ण भगवान ने अपरा एकादशी व्रत के महत्त्व के बारे में पांडवो को बताया था और इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से पांडवो ने महाभारत का युद्ध जीत लिया था।



हमारे हिन्दू धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष महत्व है, अपरा एकादशी का व्रत सभी व्रतों में विशेष फल प्रदान करने वाला है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का यह शुभ दिन है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है, हर प्रकार के संकटो से मुक्ति मिलती है, शत्रु पर विजय मिलती है और आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है।





Significance of Apara Ekadashi in Hindi- अपरा एकादशी का व्रत करने से भक्त के सभी दुःख दूर हो जाते है और इससे सभी पापों का अंत होता है। ऐसा भी कहा जाता है की इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या, भूत योनि, दूसरे की निंदा, झूठ बोलना, झूठे शास्त्र पढ़ना आदि सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते है। अपरा एकादशी के लिए पद्मपुराण में बताया गया है की इस एकादशी के व्रत से व्यक्ति को वर्तमान जीवन में चली आ रही आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है।



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