अपरा एकादशी के लिए धार्मिक ग्रंथो में उल्लेख मिलता है की महाभारत काल में युधिष्ठिर के आग्रह करने पर श्रीकृष्ण भगवान ने अपरा एकादशी व्रत के महत्त्व के बारे में पांडवो को बताया था और इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से पांडवो ने महाभारत का युद्ध जीत लिया था। ऐसा भी कहा जाता है की अपरा एकादशी का व्रत रखने से धन की प्राप्ति होती है। 

 

Apara Ekadashi 2021 Kab Hai - अपरा एकादशी 2021 कब है
Apara Ekadashi 2021 Kab Hai


हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर साल 24 एकादशी आती है, जिसमें अपरा एकादशी का अपना ही एक अलग महत्त्व है। इस एकादशी का महत्त्व महाभारत काल से जुड़ा है। अपरा एकादशी को अचरा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे की अपरा एकादशी कब है (Apara Ekadashi 2021 Kab Hai), इसका शुभ मुहूर्त, पारणा समय, महत्व और अपरा एकादशी की कथा क्या है। 



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अपरा एकादशी 2021 कब है और इसका शुभ मुहूर्त - Apara Ekadashi 2021 Kab Hai, Apara Ekadashi Shubh Muhurat 2021

हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्णा पक्ष में आने वाली एकादशी का भी बहुत महत्त्व है, इस दिन अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष अपरा एकादशी 6 जून की है, जिस दिन रविवार का दिन है। इस एकादशी के दिन गंगा स्नान करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते है और पुर्ण्य फल की प्राप्ति होती है और धन धान्य की प्राप्ति होती है।



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Apara Ekadashi Shubh Muhurat 2021 - ज्येष्ठ मास में होने वाली अपरा एकादशी तिथि का प्रारंभ 05 जून, दिन शनिवार को सुबह 04 बजकर 07 मिनट पर हो रहा है। इस ​तिथि का समापन 6 जून को प्रात: 06 बजकर 19 मिनट पर होगा। एकादशी की उदया तिथि 06 जून को प्राप्त हो रही है, इसलिए अपरा एकादशी 2021 का व्रत 06 जून, रविवार को रखा जाएगा। इस दिन ही फलाहार करते हुए व्रत रहना है और भगवान विष्णु की पूजा करनी है।




अपरा एकादशी 2021 पारण टाइम शुभ मुहूर्त - Apara Ekadashi 2021 Parana Time in Hindi

जो लोग अपरा एकादशी का व्रत रखेंगे, वो लोग अगले दिन 7 जून, दिन सोमवार को सुबह 05 बजकर 12 मिनट से सुबह 07 बजकर 59 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं। पारण से पूर्व स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु की पूजा करें। उसके बाद ब्राह्मणों को दान दें और फिर भोजन ग्रहण करके व्रत को पूरा करें।



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अपरा एकादशी के व्रत का महत्व - Apara Ekadashi Vrat Ka Mahatav

Significance of Apara Ekadashi Vrat in Hindi- हमारे हिन्दू धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष महत्व है, अपरा एकादशी का व्रत सभी व्रतों में विशेष फल प्रदान करने वाला है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का यह शुभ दिन है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है, हर प्रकार के संकटो से मुक्ति मिलती है, शत्रु पर विजय मिलती है और आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है।



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अपरा एकादशी की कथा हिंदी में - Apara Ekadashi Katha in Hindi 

Apara Ekadashi Vrat Kahani in Hindi- एक कहानी के अनुसार किसी राज्य में महीध्वज नाम का एक बहुत ही धर्मात्मा राजा था। राजा महीध्वज जितना नेक था उसका छोटा भाई वज्रध्वज उतना ही पापी था। वज्रध्वज महीध्वज से द्वेष करता था और उसे मारने के षड़यंत्र रचता रहता था। एक बार वह अपने मंसूबे में कामयाब हो जाता है और महीध्वज को मारकर उसे जंगल में फिंकवा देता है और खुद राज करने लगता है। अब असामयिक मृत्यु के कारण महीध्वज को प्रेत का जीवन जीना पड़ता है। वह पीपल के पेड़ पर रहने लगता है। उसकी मृत्यु के पश्चात राज्य में उसके दुराचारी भाई से तो प्रजा दुखी थी ही साथ ही अब महीध्वज भी प्रेत बनकर आने जाने वाले को दुख पंहुचाते।


लेकिन उसके पुण्यकर्मों का सौभाग्य कहिये की उधर से एक पंहुचे हुए ऋषि गुजर रहे थे। उन्हें आभास हुआ कि कोई प्रेत उन्हें तंग करने का प्रयास कर रहा है। अपने तपोबल से उन्होंनें भूत के भूत को देख लिया और उसका भविष्य सुधारने का जतन सोचने लगे। सर्वप्रथम उन्होंने प्रेत को पकड़कर उसे अच्छाई का पाठ पढ़ाया फिर उसके मोक्ष के लिये स्वयं ही अपरा एकादशी का व्रत रखा और संकल्प लेकर अपने व्रत का पुण्य प्रेत को दान कर दिया। इस प्रकार उसे प्रेत जीवन से मुक्ति मिली और बैकुंठ गमन कर गया।



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