रक्षाबंधन के त्यौहार का इंतज़ार हर कोई भाई बहन करते है, इस दिन बहन अपने भाई के हाथ की कलाई पर राखी बांधती है, जिसे उनके प्यार का प्रतीक कहा जाता है और इस राखी के बदले में भाई बहन को कुछ गिफ्ट देता है, साथ ही साथ बहन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा भी लेता है। 



लेकिन क्या आपको पता है की रक्षाबंधन का त्यौहार क्यों और कब मनाया जाता है, तो चलिए जानते है की रक्षाबंधन का त्यौहार क्यों मनाया जाता है - Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai 


Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai - रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है
Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai - रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है



रक्षाबंधन का त्यौहार क्यों मनाया जाता है - Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai

अगर हम रक्षाबंधन के त्यौहार की शुरुआत देखे तो इस त्यौहार में भाई की बहन से और बहन की भाई से अनेक संवेदनाये जुडी होती है। यह त्यौहार भाई बहन के रिश्ते के साथ साथ गुरु और शिष्य के बीच, भाई और भाई के बीच, बहन और बहन के बीच, माता-पिता का अपने बच्चो के बीच भी प्यार का प्रतीक हो सकता है। 



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इस प्रकार हम कह सकते है की यह त्यौहार अब केवल भाई और बहन के बीच ही सीमित नहीं है। इस बात को सिद्ध करने के लिए इतिहास में बहुत सी कथाएं मिलती है जो की कुछ इस प्रकार है-




रक्षाबंधन का त्यौहार, भविष्‍य पुराण की कथा के अनुसार

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धरती की रक्षा के लिए देवता और असुरों में 12 साल तक युद्ध चला लेकिन देवताओं को विजय नहीं मिली। तब देवों के गुरु बृहस्पति ने इंद्र की पत्नी शची को श्रावण शुक्ल की पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर रक्षासूत्र बनाने के लिए कहा। इंद्रणी ने वह रक्षा सूत्र इंद्र की दाहिनी कलाई में बांधा और फिर देवताओं ने असुरों को पराजित कर विजय हासिल की।




रक्षाबंधन का त्यौहार, वामन अवतार की कथा के अनुसार

एक बार भगवान विष्णु असुरों के राजा बलि के दान धर्म से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने बलि से वरदान मांगने के लिए कहा। तब बलि ने उनसे पाताल लोक में बसने का वरदान मांगा। भगवान विष्णु के पाताल लोक चले जाने से माता लक्ष्मी और सभी देवता बहुत चिंतित हुए। तब मां ने लक्ष्मी गरीब स्त्री के वेश में पाताल लोक जाकर बलि को राखी बांधा और भगवान विष्णु को वहां से वापस ले जाने का वचन मांगा। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी। तभी से श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन (Rakshabandhan Festival) का पर्व मनाया जाता है।




रक्षाबंधन का त्यौहार, द्रौपदी और श्रीकृष्‍ण की कथा के अनुसार

महाभारत काल में कृष्ण और द्रोपदी को भाई बहन माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं की माने तो शिशुपाल का वध करते समय भगवान कृष्ण की तर्जनी उंगली कट गयी थी। तब द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांधा था। उस दिन श्रावण पूर्णिमा का दिन था। तभी से रक्षाबंधन (Rakshabandhan Festival) श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। कृष्ण ने एक भाई का फर्ज निभाते हुए चीर हरण के समय द्रोपदी की रक्षा की थी। 




रक्षाबंधन का त्यौहार,सिकंदर और पुरू की कथा के अनुसार

इतिहास के अनुसार, राजा पोरस को सिकंदर की पत्नी ने राखी बांधकर अपने सुहाग की रक्षा का वचन मांगा था। जिसके चलते सिकंदर और पोरस ने रक्षासूत्र की अदला बदली की थी। एक बार युद्ध के दौरान सिकंदर ने पोरस पर हमला किया तो वह रक्षासूत्र देखकर उसे अपना दिया हुआ वचन याद आ गया और उसने पोरस से युद्ध नहीं किया।




ऊपर दी गयी सभी कथाओ से सिद्ध है की रक्षाबंधन (Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai) को मनाने के अलग-अलग कारण है, लेकिन आज के समय में इस पर्व को भाई बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है।



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